इसी पोर्टल पर पंजीकरण कर प्रपत्र-1 ऑनलाइन भरा जा सकता है। आवेदन उसी जनपद के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होता है जहाँ अपराध घटित हुआ है, न कि आवेदक के निवास के जनपद में। ऑफ़लाइन आवेदन सदस्य सचिव के कार्यालय में भी प्रस्तुत किया जा सकता है।
पहचान पत्र, प्रथम सूचना रिपोर्ट अथवा वाद संख्या से संबंधित अभिलेख, स्व-प्रमाणित शपथ पत्र तथा खतरे से संबंधित कोई भी उपलब्ध साक्ष्य। अभिलेख आवेदन प्रस्तुत करने के उपरान्त भी अपलोड किए जा सकते हैं।
खतरा विश्लेषण आख्या पाँच कार्य दिवसों में प्रस्तुत की जाती है और सक्षम प्राधिकारी सामान्यतः आख्या प्राप्ति के पाँच कार्य दिवसों के भीतर आदेश पारित करता है। तत्काल खतरे की स्थिति में अंतरिम संरक्षण उससे पूर्व भी स्वीकृत किया जा सकता है।
पोर्टल पर आपके नाम, पते तथा सम्पर्क विवरण एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रहते हैं। अन्वेषण अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, न्यायालय कर्मचारी एवं अधिवक्ता को केवल कूट-संकेत (alias code) दिखाई देता है। पूर्ण पहचान केवल सक्षम प्राधिकारी, खतरा विश्लेषण अधिकारी तथा साक्षी संरक्षण प्रकोष्ठ को उपलब्ध होती है, और प्रत्येक बार देखे जाने पर अभिलेख (audit log) बनता है।
नहीं। कार्यवाही बंद कक्ष में होती है और आवेदन की प्रति अभियुक्त अथवा उसके अधिवक्ता को नहीं दी जाती। न्यायालय के लिखित आदेश के बिना कोई अभिलेख साझा नहीं किया जाता।
कोई भी साक्षी, पीड़ित-साक्षी, उसका परिजन अथवा विधिक प्रतिनिधि आवेदन कर सकता है, जिसे गवाही देने के कारण अपने जीवन, प्रतिष्ठा अथवा सम्पत्ति को खतरा हो। न्यायालय, शासन, पुलिस महानिदेशक अथवा अभियोजन अधिकारी के लिखित अनुरोध पर भी कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है।
मृत्युदंड अथवा आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध, सात वर्ष या उससे अधिक कारावास से दंडनीय अपराध, तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 से 79 के अपराध — इनमें दंड की अवधि पर ध्यान दिए बिना।
नहीं। आवेदन, सुनवाई तथा संरक्षण उपायों पर कोई शुल्क देय नहीं है। समस्त व्यय साक्षी संरक्षण निधि से वहन किए जाते हैं।
सर्वप्रथम 112 पर पुलिस को सूचित करें अथवा निकटतम थाने से सम्पर्क करें। आवेदन उसके उपरान्त प्रस्तुत करें — पोर्टल आपातकालीन सेवा का विकल्प नहीं है।
आदेश में अंकित अवधि तक — सामान्यतः तीन माह से एक वर्ष। अवधि समाप्ति से पूर्व समीक्षा होती है और आवश्यकता बनी रहने पर अवधि बढ़ाई जा सकती है। खतरा समाप्त होने पर आदेश वापस भी लिया जा सकता है।
पहचान की गोपनीयता, आवागमन में सुरक्षा, निवास पर सुरक्षा व्यवस्था, दूरभाष एवं पते का परिवर्तन, बंद कक्ष अथवा वीडियो लिंक द्वारा साक्ष्य, अस्थायी अथवा स्थायी स्थानान्तरण तथा अत्यंत गंभीर स्थिति में पहचान परिवर्तन।
आपका प्रश्न यहाँ नहीं है? सहायता अनुभाग से पूछें
अथवा हेल्पलाइन 1090 पर संपर्क करें।
