उत्तर प्रदेश साक्षी संरक्षण योजना, 2024

योजना के बारे में

गवाही देने वाले व्यक्ति और उसके परिवार की सुरक्षा राज्य का दायित्व है। यह योजना उसी दायित्व को एक निश्चित प्रक्रिया देती है।

उद्देश्य

योजना का उद्देश्य

किसी भी आपराधिक विचारण का आधार साक्ष्य है, और साक्ष्य का आधार वह व्यक्ति है जो न्यायालय के समक्ष सत्य कहने के लिए उपस्थित होता है। यदि वह व्यक्ति भयभीत है, तो विचारण अपने आप निर्बल हो जाता है। इस योजना का उद्देश्य यही भय दूर करना है — ताकि साक्षी बिना दबाव, प्रलोभन अथवा धमकी के अपना कथन दे सके।

  • साक्षी तथा उसके निकट परिजनों के जीवन, संपत्ति एवं प्रतिष्ठा की रक्षा।
  • खतरे के स्तर के अनुसार श्रेणीबद्ध, आनुपातिक संरक्षण उपाय।
  • पहचान की गोपनीयता, जहाँ आवश्यक हो वहाँ छद्म नाम (उपनाम) के माध्यम से।
  • आवेदन से आदेश तक एक समयबद्ध, अभिलेखित और पुनर्विलोकनीय प्रक्रिया।
  • प्रत्येक स्तर पर उत्तरदायित्व — कौन देखा, कब देखा, यह सब अंकित रहता है।
विधिक आधार

योजना का विधिक आधार

माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा महेन्द्र चावला बनाम भारत संघ (2018) में साक्षी संरक्षण योजना, 2018 को अनुमोदित करते हुए यह अभिनिर्धारित किया गया कि जब तक संसद अथवा राज्य विधानमंडल विधि नहीं बनाते, तब तक यह योजना अनुच्छेद 141/142 के अंतर्गत विधि के रूप में प्रवर्तनीय रहेगी। उत्तर प्रदेश साक्षी संरक्षण योजना, 2024 उसी अधिदेश के अनुपालन में राज्य में लागू है।

प्रावधानसार
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 — धारा 398 प्रत्येक राज्य सरकार के लिए साक्षी संरक्षण योजना बनाना अनिवार्य।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 — धारा 232 साक्ष्य देने से रोकने अथवा मिथ्या साक्ष्य के लिए विवश करने पर दंड।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 — धारा 151 साक्षी से अभद्र अथवा अपमानजनक प्रश्न पर न्यायालय का संरक्षण।
साक्षी संरक्षण योजना, 2018 — खंड 7 खतरा विश्लेषण आख्या के आधार पर श्रेणी अनुसार संरक्षण।
श्रेणियाँ

संरक्षण की तीन श्रेणियाँ

श्रेणी का निर्धारण खतरा विश्लेषण आख्या के आधार पर सक्षम प्राधिकारी करता है।

श्रेणी क

जीवन को संकट

जहाँ साक्षी अथवा उसके परिजन के जीवन को अन्वेषण, विचारण अथवा उसके पश्चात भी गंभीर संकट है। इसमें सशस्त्र सुरक्षा, सुरक्षित आवास तथा आवश्यकता पड़ने पर पहचान परिवर्तन एवं स्थानांतरण तक सम्मिलित हो सकता है।

श्रेणी ख

सुरक्षा, प्रतिष्ठा अथवा संपत्ति को संकट

जहाँ जीवन को प्रत्यक्ष संकट नहीं है, किंतु अन्वेषण अथवा विचारण की अवधि में सुरक्षा, प्रतिष्ठा अथवा संपत्ति को संकट है। सामान्यतः पुलिस गश्त, दूरभाष निगरानी तथा न्यायालय आवागमन में सुरक्षा दी जाती है।

श्रेणी ग

उत्पीड़न अथवा धमकी

जहाँ साक्षी को अभियुक्त अथवा उसके सहयोगियों से उत्पीड़न, धमकी अथवा मानसिक दबाव की आशंका है। सामान्यतः परामर्श, पहचान की गोपनीयता तथा न्यायालय परिसर में पृथक प्रतीक्षा कक्ष जैसे उपाय पर्याप्त होते हैं।

संस्थागत ढाँचा

सक्षम प्राधिकारी एवं साक्षी संरक्षण प्रकोष्ठ

सक्षम प्राधिकारी (जनपद स्तर)

आवेदन पर निर्णय एवं संरक्षण आदेश निर्गत करने हेतु।

  • अध्यक्ष — जनपद एवं सत्र न्यायाधीश
  • सदस्य — जिलाधिकारी
  • सदस्य सचिव — संयुक्त/उप निदेशक, अभियोजन

साक्षी संरक्षण प्रकोष्ठ (राज्य स्तर)

आदेशों का क्रियान्वयन, समन्वय एवं अनुश्रवण।

  • पुलिस महानिदेशक कार्यालय के अधीन गठित।
  • खतरा विश्लेषण आख्या का समन्वय एवं प्रस्तुतीकरण।
  • संरक्षण उपायों का वास्तविक क्रियान्वयन एवं समीक्षा।
  • साक्षी के साथ सुरक्षित संवाद का एकल बिंदु।